“यादव बनाम यादव की लड़ाई”, सपा मुखिया अखिलेश के लिए क्यों आजमगढ़ लोकसभा है “नाक का सवाल”?

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Azamgarh Loksabha Seat Election: उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ लोकसभा सीट का राजनीतिक ताना-बाना लंबे समय से मुस्लिमों और यादवों के बीच गठबंधन से बुना गया है। इस चुनावी गठजोड़ ने लगातार अखिलेश यादव को यहां जीत दिलाई है। अगर आंकड़ों की बात करें, तो इस चुनावी गठजोड़ को पिछले 20 में से 17 चुनावों में जीत मिली है, जो इसकी ताकत को साफ दिखाता है। हालांकि इस लोकसभा चुनाव में इस ‘MY’ समीकरण की अलग परीक्षा का सामना करना पड़ रहा है। आजमगढ़ में आज 25 मई को छठवें चरण में मतदान हो रहा है।

आजमगढ़ में आज 25 मई को छठवें चरण में मतदान हो रहा है। इस बार चुनावी लड़ाई, मुख्य रूप से दो यादव उम्मीदवारों के बीच है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने भोजपुरी अभिनेता और मौजूदा सांसद दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ को मैदान में उतारा हुआ है। वहीं समाजवादी पार्टी (SP) ने धर्मेंद्र यादव पर दांव लगाया है, जो अखिलेश यादव के चचेरे भाई हैं। इनके अलावा बीएसपी ने मशूद अहमद को उम्मीदवार बनाया है, जिन्होंने मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। आजमगढ़ लोकसभा सीट पर कुल 9 उम्मीदवार हैं।

वाराणसी के वरिष्ठ पत्रकार रमेश सिंह ने कहा, “सपा मुखिया अखिलेश यादव ने उपचुनाव की हार को हल्के में नहीं लिया है। इस बार अखिलेश के लिए आजमगढ़ जीतना एक मुश्किल चुनाव है और नाक का सवाल भी है।” उन्होंने कहा कि इस चुनाव की इतनी अधिक अहमियत है कि अखिलेश की पत्नी डिंपल समेत उनके परिवार के लगभद सभी सदस्य वहां चुनाव प्रचार करने उतर गए थे।

ऐतिहासिक रूप से प्रसिद्ध आजमगढ़ को कभी अयोध्या सिंह उपाध्याय और कैफी आजमी जैसे साहित्यकारों के नाम से जाना जाता था। हालांकि बाद में आतंकवादियों और अंडरवर्ल्ड डॉन से कनेक्शन के चलते इस शहर को बदनामी का भी सामना करना पड़ा। हालांकि इसके बावजूद, इस इलाके में हाल के सालों में काफी तरक्की हुई है और इसका झुकाव शांति की ओर हुआ है।

गुड्डू जमाली फैक्टर

हाल ही में सपा में शामिल हुए शाह आलम उर्फ ​​गुड्डू जमाली ने चुनावी समीकरणों को और भी गरम कर दिया है। गुड्डू जमाली ने 2014 में मुलायम सिंह यादव के खिलाफ बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और 2.66 लाख से ज्यादा वोट हासिल किए थे। 2022 के उप-चुनाव में भी गुड्डू जमाली को 2.66 लाख वोट मिला था और धर्मेंद्र यादव इस उपचुनाव में निरहुआ से महज 8,679 वोटों के अंतर से हार गए थे। हालांकि अब गुड्डू जमाली सपा में आ गए और अपने समर्थकों को धर्मेंद्र यादव के पक्ष में वोट करने की अपील कर रहे हैं।

लोगों के पाला बदलने और वोट में बंटवारे की संभावना के चलते यह चुनाव काफी रोचक हो गया है। 2009 के परिसीमन के बाद आजमगढ़ के संसदीय क्षेत्र में अब आजमगढ़ सदर, गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर और मेहनगर की विधानसभा भी शामिल हो गई है। इन सभी सीटों पर सपा के विधायक हैं। उत्तर प्रदेश में BJP की मजबूत उपस्थिति के बावजूद, सपा ने 2022 के विधानसभा चुनावों के दौरान जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी, जो MY गठबंधन की ताकत को दिखाता है।

पिछले कुछ दशकों में आजमगढ़ का राजनीतिक परिदृश्य काफी बदलाव। 1984 तक इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा था। हालांकि मंडल-कमंडल की राजनीति और 1989 में बीएसपी के उदय के बाद कांग्रेस ने इस सीट पर अपनी पकड़ खो दी। साल 2009 में बीजेपी को सफलता मिली, लेकिन उसके बाद के चुनावों में यह सीट फिर से सपा के खाते में चली गई। मुलायम सिंह यादव और बाद में अखिलेश यादव दोनों यहां से सांसद बने।

चुनाव नजदीक आने के साथ मतदाताओं में बेरोजगारी एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरा है। अखिलेश यादव और निरहुआ दोनों ही इलाके के विकास का दावा कर रहे हैं। जिले की जनसंख्या को देखें, तो यहां करीब 24% दलित, 20% यादव और 12% मुस्लिम हैं, जो किसी भी उम्मीदवार की हार जीत तय करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

आजमगढ़ लोकसभा सीट पर प्रमुख उम्मीदवार

दिनेश लाल यादव “निरहुआ” (BJP): भोजपुरी अभिनेता और गायक निरहुआ इस सीट से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। 2022 के उपचुनाव में सपा के धर्मेंद्र यादव को हराकर वह यहां से पहली बार सांसद बने थे।

धर्मेंद्र यादव (SP): मुलायम सिंह यादव के भतीजे और अखिलेश यादव के चचेरे भाई, धर्मेंद्र यादव आजमगढ़ से दूसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं। इससे पहले वे मैनपुरी और बदायूं से सांसद रह चुके हैं, लेकिन 2022 के उपचुनाव में वे निरहुआ से हार गए थे।

मसूद अहमद (BSP): पहाड़पुर के स्थानीय निवासी और छात्र राजनीति में गहरी पैठ रखने वाले मसूद अहमद हाल ही में अपनी पत्नी के साथ बसपा में शामिल हुए हैं। वे मुस्लिम समुदाय और बसपा के दलित वोटबैंक दोनों का वोट पाने की उम्मीद कर रहे हैं।

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